छिंदवाडा: प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भले ही जिले के अध्यक्षों की सूची जारी कर दी हो, लेकिन कई जिलों में चल रहे विरोध के कारण नेताओं को परेशानियों का सामना करना पड रहा है। इसके ठीक उलट प्रदेश कांग्रेस ने ये संकेत दे दिए है कि बनाए गए जिलाध्यक्षों को हर तीन माह में अपनी रिपोर्ट देनी होगी। उन्होने क्या किया और क्या छूट गया, इसपर भी पूरी रिपोर्ट बनाना होगा। कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय से आई इस खबर ने साफ कर दिया कि कांग्रेस अपने जिलाध्यक्षों को खुला नहीं छोडेगी। खबर है कि रिपोर्ट संतोषजनक नहीं होने पर इन जिलाध्यक्षों की न केवल क्लास ली जाएगी बल्कि उन्हें लगातार दिशा निर्देश भी दिए जाऐंगे। इन संकेतों के बाद कांग्रेस के नए जिलाध्यक्षों के लिए संघर्ष करना जरुरी हो जाएगा। पार्टी नेताओं ने संकेत दिए कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पहले की तरह काम नहीं करेंगे, उससे कहीं ज्यादा सक्रिय होना होगा। गौरतलब है कि हाल ही में प्रदेश कांग्रेस की जारी सूची में युवाओं को ज्यादा महत्व दिया गया है, इसके अलावा कहीं कहीं अनुभव का उपयोग भी हुआ है। बहरहाल कांग्रेस अध्यक्षों की कार्यशैली पर नजर रखना और उनसे रिपोर्ट मांगना नया प्रयोग माना जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस कितनी मजबूत होगी, आने वाले समय में ही तय होगा।
बूथ स्तर तक की रिपोर्ट मांगेगी कांग्रेस
बताया ये भी जा रहा है कि कांग्रेस बूथ स्तर तक की रिपोर्ट जिलाध्यक्षों से मांग सकती है। दरअसल पिछले चुनाव में जिस तरह से भाजपा ने जीत का परचम लहराया था उसके बाद से कांग्रेस नेता सकते में थे। इसके अलावा कुछ बडे नेता भी कांग्रेस छोडकर भाजपा में चले गए, जिसने कांग्रेस को काफी कमजोर कर दिया था। ऐसे में प्रदेश कांग्रेस उसे मजबूत करने की कोशिश में है। फिलहाल भारी गुटबाजी और असंतोष के चलते कांग्रेस नेता इसमें कितने कामयाब होंगे, अभी कहना जल्दबाजी होगी।










