रक्षाबंधन पर किस नेताजी की कलाई हुई रंगीन, कौन से नेताजी नहीं बंधवाना चाहते रक्षासूत्र, कमजोर महिला संगठन के भरोसे कौन सी पार्टी, त्यौहारों पर किस संगठन की पकड मजबूत, किस दल की महिलाएं बेहतर माहौल तैयार कर दे रही संदेश

छिंदवाडा: भाई बहन का पर्व रक्षा बंधन आज है। जहां घर घर में बहन अपने भाईयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधेगी वहीं राजनीति के भाईयों की कलाई में भी महिला संगठनों की बहनों के रक्षा सूत्र नजर आने लगे है, लेकिन ये बहने केवल भाजपा की है, जो अपने पार्टी के भाईयो को रक्षा सूत्र बांध चुकी है या फिर आज बांधेगी, कांग्रेस में ये चलन अभी नजर नहीं आया है। केवल एक बार पूर्व सांसद नकुलनाथ को अपनी सक्रियता दिखाने महिला संगठन ने इस तरह का एक आयोजन किया था, लेकिन उसके बाद कांग्रेस के भाई भी रक्षाबंधन में गायब हो गए और बहनें भी। ऐसा क्यों हुआ समझ से परे है। यही वजह है कि कांग्रेस के महिला संगठनों पर सवाल खडे होने लग गए है। इसके ठीक उलट भाजपा की बहनें इस मामले में बेहद सक्रिय और तेज है, भाजपा के भाई भी इसमें पूरी रुचि दिखाते है। यही वजह है कि भाजपा के जिलाध्यक्ष शेषराव यादव बहनों से रक्षासूत्र बंधवा चुके है, रक्षाबंधन पर सांसद विवेक बंटी साहू इस आयोजन का हिस्सा बनने जा रहे है। भाई बहन का ये पर्व कांग्रेस कार्यालय से ऐसे गायब हो गया मानों इससे कोई लेना देना ही नहीं। ऐसे में कहा जाने लगा है कि कांग्रेस कार्यालय से त्योहार गायब हो रहे है, इनका स्थान विवादों ने ले लिया है। केवल बैठकों में पहुंचने वाली महिलाओं का किसी तरह के त्यौहारों से कोई लेना देना नहीं रहा। पूरे जिले में ऐसे ही हालात है। भाजपा के महिला संगठन ने जिस तेजी के साथ त्योहारों पर सक्रियता बढाई है वह कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी मानी जा सकती है। बडा सवाल ये है कि क्या कांग्रेस इसी तरह के महिला संगठन के भरोसे आने वाले समय में चुनाव लडेगी।

कहीं नेताजी को परहेज तो नहीं

जितनी सहजता से भाजपा रक्षाबंधन का पर्व मना रही है, कांग्रेस में हालात उतने ही जटिल नजर आ रहे है। यहां पर महिला संगठन की रुचि न होने से ये हालात बन रहे है। खबर ये भी है कि कुछ नेताओं ने महिलाओं से रक्षासूत्र बंधवाने की मनाही कर दी है। ऐसा क्यों हुआ, इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन वरिष्ठ नेता इस बात से इंकार कर रहे है। उधर भाजपा के नेता जिस तरह से इस पर्व को मना रहे है और महिलाएं जितनी उत्साहित नजर आई उसने पूरे शहर में एक नया संदेश देने का काम किया है। फिलहाल कांग्रेस में पूर्व सीएम कमलनाथ और पूर्व सांसद नकुलनाथ इस मामले में गंभीरता बरते हुए है। वे भी संदेश दे चुके है कि किसी भी पर्व या त्यौहार पर महिला संगठन पूरी तरह से अपनी सहभागिता दें और बेहतर माहौल तैयार कर लोगों के बीच जाए। बहरहाल रक्षाबंधन के इस पर्व ने राजनीतिक दलों के हालातों को बयां करने का काम किया है।