रेत चुनाव में निकालेगी नेताओं का तेल, राजनीति भूलकर कमाई के चक्कर में पडे नेता

  • विरोध की राजनीति हुई औपचारिक
  • दोनों दलों के युवा राजनीति से भटके
  • परंपरा ने युवाओं को बनाया शेयर होल्डर

छिंदवाडा: जिले में इन दिनों रेत माफिया का बोलबाला है। जमकर पैसा कमाने की चाहत में अब इस कारोबार में युवा नेताओं की भी कतार सी लग गई है। इसमें न केवल सत्ता पक्ष बल्की विपक्ष के नेतााओ में भी शामिल होने की जानकारी सामने आ रही है। खबर ये भी है की ये जुगलबंदी इस कदर चल रही है कि यह समझना मुश्किल हो रहा है सत्ता पक्ष में कौन है और विपक्ष में कौन? सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रेत के खेल में ऐसा पहली बार हुआ है जब दोनो दलों के युवा नेता एक साथ मिलकर चांदी काट रहे है। राजनीतिक नुकसान से परे उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है समय रहते पैसा कमा लेना। इस उद्देश्य के चलते चुनाव लडने वाले नेताओं के सामने बडा संकट खडा हो गया है। सूत्र बताते है युवा नेता राजनीति को भुला बैठे है। यह दिखाई भी देने लगा है। सूत्रों ने यह भी बताया कि इसमें कांग्रेस के बडे युवा नेताओं का समूह शामिल हो गया है। यही वजह है कि इन नेताओं की मैदानी सक्रियता कम हो गई है। हालात ऐसे ही रहे तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि आने वाले समय में इसका खामियाजा राजनेताओं को भुगतना पडे।

  • फंस गए जाल में

सूत्रों का मानना है कि इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा फजीहत कांग्रेस की हो रही है। जो नेता रेत के मामले में शेयर होल्डर है वे खुलकर विरोध करना नहीं चाहते। सत्ता पक्ष के साथ चलना उनकी मजबूरी नजर आती है। इतना ही नहीं जिन युवा नेताओं को इस मामले की खबर है वे भी नाराज है। इसके अलावा यदि रेत के मामले में कुछ गलत हो भी रहा है तो भी वे विरोध नहीं कर सकते। उधर इस मामले में भाजपा के नेता भी नहीं बचे है। उन्हें भी क्षेत्र में विरोध का सामना करना पड रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता यह कहने से नहीं चूक रहे कि उनके जाल में अभी रेत के युवा पार्टनर है। सूत्रों ने यह भी बताया कि यह एक बडी वजह है कि युवक कांग्रेस बेहद कमजोर हो गई है। बहरहाल यदि हालात यही रहे तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि आने वाले समय में इसके दुष्परिणाम चुनाव में नजर आऐंगे। किसे कितना नुकसान होगा यह अभी कहना जल्दबाजी होगी।