छिंदवाडा: जिले में कांग्रेस भले ही कार्यकर्ताओं में जोश का दावा करती नजर आए, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। पहले के नतीजों से सबक न लेकर कांग्रेस नेता केवल कार्यालय में बैठकों तक सीमित हो गए है। हालात ये है कि बूथ पर कांग्रेस की हालात आज भी शून्य बनी हुई है। उधर कांग्रेस भवन में जो कुछ चल रहा है उससे वहां के नेता ही ये कहने लगे है कि आने वाले समय में कहीं दाग न लग जाए,, ऐसे हालातों के चलते कांग्रेस से न तो बेहतर महिलाओं का जुडाव हो रहा है और न ही युवाओं की फौज कांग्रेस के साथ दिखाई दे रही है। खबर तो ये भी है कि पूर्व सीएम कमलनाथ और पूर्व सांसद नकुलनाथ इस मामले में बेहद नाखुश है। उन्होने हाल ही में संकेत भी दिए थे कि जल्दी ही कुछ संगठनों में बदलाव देखने को मिलेगा। इसमें शहर के साथ साथ जिला भी शामिल हो सकता है। गौरतलब है कि युवक कांग्रेस से अचानक गायब हुए युवा कांग्रेस नेताओं के लिए बेहद हैरानी का विषय बने हुए है। यही हालात महिला कांग्रेस के भी है। आधी आबादी को लेकर कांग्रेस के नेता गंभीर नहीं है। कांग्रेस भवन में कुछ समय से महिलाओं के बीच जो कुछ चल रहा है वह पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसा पहली बार हो रहा है जब महिला कांग्रेस में इस तरह के हालात बने हुए है।
क्यों कहा जा रहा, कहीं दाग न लग जाए
गाने की ये पंक्तियां कांग्रेस कार्यालय में इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। कहा जा रहा है कि आने वाले समय में कुछ ऐसा निकलकर सामने आ सकता है जो कांग्रेस को बडा नुकसान पहुंचा सकता है। कांग्रेस के नेता भी इससे इत्तेफाक रखते है। इन नेताओं का कहना है कि सारी जानकारी वरिष्ठों के पास है लेकिन कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाया जा सका है। कहा ये भी जा रहा है कि इस तरह के मामले यदि विरोधी दलों के हाथ लगे तो कांग्रेस नेताओं के लिए बडी फजीहत हाे सकती है। फिलहाल महिला कांग्रेस में नेताओं की पत्नियों के साथ साथ पुरानी महिलाओं की भी उपस्थिति शून्य हो गई है। ये तमाम जानकारी पूर्व सीएम कमलनाथ और पूर्व सांसद नकुलनाथ को भी दी जा चुकी है। सूत्र बताते है कि नाराज नेता जल्दी ही बडा उलटफेर कर सकते है।
भीड नहीं बूथ पर मजबूती तय करेगी मैदानी हकीकत
कांग्रेस में इन दिनों एक नई परंपरा चल निकली है। कार्यालय में सप्ताह में एक या दो दिन बैठकों का दौर चलता है। इसमें सभी नेताओं को बुलाया जाता है। रणनीति पर विचार होता है, बैठक के बाद सब अपने अपने काम से लग जाते है। हैरान करने वाली बात ये है कि कांग्रेस ने अभी तक अपने पुराने अनुभव से कोई सबक नहीं लिया। यही वजह है कि मैदान में कांग्रेस शून्य के हालात में है। भीड से नेताओं को खुश करने की परंपरा अभी भी कायम है। सूत्रों का कहना है कि जल्दी ही पूर्व सीएम और पूर्व सांसद संगठन की सर्जरी कर सकते है। इसमें तमाम समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नियुक्तियां की जा सकती है।










