संगठन से नदारद, सत्ता की धुरी के पीछे घूमकर काम साधने की तैयारी में नए भाजपाई, आर्थिक हित साधने वालों से परेशान पुराने नेता

छिंदवाडा: जिले में कांग्रेस से भाजपा में आए नेता इन दिनों परेशान है। दरअसल वे जिस मकसद से आए थे वे उन्हें पूरा होते नजर नहीं आ रहा है। यही वजह है कि वे भाजपा के संगठन से दूर सत्ता की धुरी के पीछे घूम रहे है। ये नजारा लोकसभा चुनाव में भाजपा के जीत दर्ज कराने के बाद देखने को मिल रहा है। अपने काम को साधने के लिए नए भाजपाई सत्ता की धुरी के इर्द गिर्द ही नजर आते है। वे पुराने भाजपाईयों को किनारे करने में कोई कसर नहीं छोड रहे है। हालात ये है कि संगठन के किसी भी कार्यक्रम में एक दो ही नए भाजपाई नजर आते है। सूत्रों का कहना है कि नए भाजपाई इस बात के इंतजार में है कि उनका आर्थिक वनवास जल्दी खत्म हो। इस बात की रिपोर्ट भोपाल से लेकर दिल्ली तक भेजी जा चुकी है। सूत्रों की मानें तो इस रिपोर्ट को भाजपा बेहद गंभीरता से ले रही है और इसी आधार पर आने वाले समय में पद भी दिए जाने की बात सामने आ रही है। कहा जा रहा है कि नगर निगम हो या फिर कोई और संस्था सभी में नए भाजपाईयों को एडजस्ट करने का फार्मूला प्रदेश से लेकर दिल्ली तक तय किया जा चुका है। संगठन में भूमिका पर इनकी रिपोर्ट मांगी गई है। गौरतलब है कि लोकसभा के दौरान बडी संख्या में कांग्रेस से नेताओं ने पलायन किया था, भाजपा को उम्मीद थी कि जीत के बाद ये नए भाजपाई उनके संगठन के लिए काम करेंगे और पार्टी मजबूत होगी, लेकिन सारे अनुमान धरे के धरे रह गए। तमाम नए भाजपाईयों ने संगठन से ऐसे दूरी बना ली जैसे वे पार्टी में किसी और लक्ष्य के लिए आए थे। बहरहाल नए भाजपाईयों की रिपोर्ट संगठन अपने स्तर पर प्रदेश और केंद्र को भेज रहा है। रिपोर्ट में क्या है और इसके क्या नतीजे होंगे आने वाले समय में साफ हो जाएगा।

  • दीपक सक्सेना के समर्थक भी इंतजार में 

लंबे समय से अपने राजनीतिक वनवास के खत्म होने की राह देख रहे कद्दावर नेता दीपक सक्सेना के समर्थक भी इस बात के इंतजार में है कि उनका राजनीतिक वनवास कब खत्म होगा। अगस्त में उन्हें किसी बडे पद पर आसीन होने की उम्मीद समर्थक लगा रहे है। हालांकि अभी तक किसी तरह के संकेत नहीं मिले है। इस मामले में हो रही देरी सक्सेना समर्थकों की बडी निराशा का कारण बन रही है। हो सकता है कि आने वाले समय में ये देरी भाजपा के लिए परेशानी साबित हो।