निगम में शुरु हुआ अपनी अपनी ढफली, अपना अपना राग, अधिकारियों से महापौर तो महापौर से सभापति खफा,,, किसने कहा पहले कांग्रेस में ही अच्छे थे, अचानक क्यों शुरु हुआ विवाद, कहीं फाईलों का खेल तो नहीं,,,

छिंदवाडा: नगर निगम में इन दिनों सभापतियों के बीच अपनी अपनी ढफली अपना अपना राग का कार्यक्रम चल रहा है। चुनाव को एक साल का समय बचा है, हर कोई अपने अनुसार काम कराना चाह रहा है। फिर काम से पैसा भी बनाना है, इसी बात को लेकर लडाई तेज हो गई है। इसमें महापौर का नाम आने से मामला और गंभीर हो गया है। महापौर अधिकारियों से खफा है, उनकी नाराजगी ये है कि अधिकारी वो काम नहीं कर रहे है जो वे चाह रहे है। काम कौन से है और कैसे है, ये जानकारी नहीं है लेकिन जो कुछ सामने आ रहा है उससे कहा जाने लगा है कि अधिकारी कोई रिस्क लेने तैयार नहीं है। रही बात सभापतियों की तो जो सभापति कभी महापौर के चहेते होते थे वे अब उनके खिलाफ ताल ठोंक रहे है। ऐसा क्यों हो रहा है महापौर के साथी चिंतित है। हाल ही में हुई एमआईसी में ये सारी बातें साफ तौर पर नजर आई। अधिकारी भी टकटकी लगाए बैठे है। दो गुटों की लडाई में उन्हे क्यों घेरा जा रहा है। दरअसल पूरे मामले में तू डाल डाल मैं पात पात की स्थिति जिम्मेदार है। निगम के हालातों पर किसी का ध्यान नहीं है। निगम की आय से कहीं ज्यादा चिंता अपनी आय की है। फाइलों की लडाई मुख्य वजह बनी हुई है। ऐसे में भाजपा की परिषद पूरे शहर में चर्चा का विषय बनती जा रही है। कांग्रेस के नेता इसमें खामोश होकर नजारे देख रहे है।

किसने कहा पहले कांग्रेस में ही अच्छे थे

हालात यहां तक पहुंच गए है कि एक नाराज भापति ने यहां तक कह दिया कि पहले कांग्रेस में ही अच्छे थे। यहां पर किसी की सुनवाई नहीं हो रही है। इस सभापति ने कांग्रेस के कुछ पार्षदों से चर्चा भी की। सभापति कौन है अधिकांश भाजपा पार्षद जानते है। सूत्रों की मानें तो ये सभापति इन दिनों जमकर चर्चाओं में है। कुछ समय पहले ये किसी और के विभाग में दखल दे रहे थे। अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए इनकी आक्रामकता सामने आती रहती है। इस सभापति से कुछ नेता भी नाराज है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अपने स्वार्थ के लिए भाजपा में गए कुछ सभापति अब पछता रहे है।

एमआईसी नही होने दूंगा, बोले एक सभापति

उधर भाजपा के ही एक सभापति ने ये तक कह डाला कि एमआईसी कैसे होती है, हम देख लेंगे। सूत्रों का कहना है कि इस सभापति ने तो यहां तक कह दिया कि जो कुछ प्रस्ताव लाए जा रहे है सारे पैसे कमाने वाले है। इसी कारण से एमआईसी में वे शामिल नहीं होगे। इस सभापति ने ये भी दावा किया कि उनके साथ तीन से चार सभापति है। इसके अलावा वे अपने नेताओं के सामने भी इस बात को रख चुके है। इसके बावजूद यदि एमआईसी की बात आई तो वे खुला विरोध करेंगे। उधर प्रस्तावों पर मुहर लगाने की राह देख रहे दो सभापति इस बात से निराश है कि एकाएक रोडा क्यों अटका दिया गया। फिलहाल पूरा मामला फैसलों और फाइलों का है। अब प्रभारी मंत्री आ रहे है, जाहिर है उनके सामने भी सारी बातों को रखा जाएगा, लेकिन उनके साथ मौजूद रहने वाले अधिकारी भी यहां के हालातों को जानते है। ऐसे में मंत्री जी के रुख पर सभी सभापतियों और नेताओं की निगाहें लगी रहेगी।