राज्यसभा में कांग्रेस को क्यों चाहिए नाथ का साथ, हार्स ट्रेडिंग की आशंका से पार्टी चिंता में, दूसरे नामों पर एकजुट नहीं है विधायक, कुछ नेता बोले नाथ जरुरत के साथ जरुरी भी,,,

भोपाल: राज्यसभा के गणित को लेकर कांग्रेस में खासी चिंता है। दरअसल दूसरे राज्यों की तरह ये सीट हाथ से न फिसल जाए ये बात कांग्रेस को सता रही है। यही वजह है कि ऐसे नाम पर चिंतन किया जा रहा है जो विधायकों को एकजुट कर साध सके। पार्टी सूत्रों के अनुसार दिल्ली में सभी नामों पर मंथन किया जा चुका है, केवल एक नाम को छोडकर किसी भी नाम पर विधायकों की एकराय नजर नहीं आ रही है। बताया जा रहा है कि पूर्व सीएम कमलनाथ के नाम पर विधायक एकजुट होने को तैयार है। यही वजह है कि राज्यसभा के लिए नाथ का साथ कांग्रेस को जरुरी हो गया है। उधर भाजपा भी इस सीट पर तोड फोड करने की रणनीति बना रही है, लेकिन सूत्रों की मानें तो पूर्व सीएम कमलनाथ के मैदान में आ जाने से भाजपा के लिए विधायकों में तोडफोड आसान नहीं होगी। उधर जिले से जिस नेता को मैदान में उतारने के लिए भाजपा सोच रही है, उसपर भाजपा के ही नेता एक राय नहीं है। हालांकि जिले में भाजपा के विधायक नहीं है लेकिन बावजूद इसके नए नाम पर प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों के विधायकों में एकराय नहीं होने की बात सामने आ रही है। सूत्रों का कहना है कि पूर्व सीएम कमलनाथ के नाम पर कांग्रेस के दूसरे वरिष्ठ नेताओं ने भी हामी भर दी है। स्वयं पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे दिग्विजय सिंह ने भी अपनी सहमति जताई है हालांकि उन्होने किसी तरह का बयान नहीं दिया है लेकिन सूत्र बताते है कि श्री सिंह नाथ के नाम पर अपनी राय आलाकमान को दे चुके है। गौरतलब है कि पार्टी में जिस तरह से नाम सामने आ रहे है उनके अपने क्षेत्रों के आस पास के विधायक भी मतदान के दौरान झटका दे सकते है। फिलहाल राज्यसभा के लिए कांग्रेस में नाथ की जरुरत पर जोर दिया जाने लगा है। कहा जा रहा है कि जल्दी ही कांग्रेस नाम की घोषणा कर सकती है।

प्रदेश में कांग्रेस की मजबूती पर जोर

खबर ये भी है कि पूर्व सीएम कमलनाथ के पक्ष में सामने आए नेताओं ने साफ किया है कि उनकी सक्रियता से प्रदेश में कांग्रेस मजबूत होगी। लंबे समय से सक्रिय राजनीति कर रहे नाथ के समर्थकों ने भी इस मामले में अपनी राय आलाकमान काे दी है। गौरतलब है कि काफी समय से कांग्रेस संघर्ष के दौर से गुजर रही है, ऐसे में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच हताशा साफ नजर आने लगी है। यदि इस बार भी कांग्रेस ने अपना रुख न बदला तो इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि आने वाले समय में उसे कार्यकर्ताओं को संभालने में खासी परेशानियों का सामना करना पडेगा।