न पैसा न पानी, नगर निगम की कहानी, अवैध कॉलोनी में नेताजी का मकान आया तो सैटिंग से अलग करवा दिया रकबा, समस्या निपटाने के लिए बातचीत के बहाने फाइलों को रोना, चुनाव के पहले निगम को निपटाने में लगे नेताजी,,,

छिंदवाडा: नगर निगम सुर्खियों में है। पानी को लेकर अफसर के साथ साथ जनप्रतिनिधियों ने भी चिंता जाहिर कर दी है, लेकिन फाईलों को निपटाने का दौर कम नहीं हुआ है। समस्या निपटाने के बहाने अफसरों के पास पहुंचने वाले नेताजी गाहे बगाहे कह ही देते है कि साहब ये वाली फाइल निपटा देते तो अच्छा होता। पानी और पैसे से परेशान अफसरों को ये समझ नहीं आ रहा है कि आखिर करें भी तो क्या। नेताजी को फाइलें निपटाने की पडी है तो कुछ डीजल को लेकर परेशान है। जन समस्या से कहीं ज्यादा चिंता अपनी समस्या की है। निगम से वेतन के तौर पर फाइलों को बनाने वाले कुछ नेताजी को विद्रोह के मूड में आ गए है। हालात ऐसे है कि पानी की समस्या से कहीं बडी अब पैसों की समस्या बनने लगी है। पानी की समस्या को लेकर नेताजी इसलिए भी ज्यादा परेशान नजर नहीं आते क्योंकि वह जनता से जुडा मसला है और इस समस्या में अधिकांश भागीदारी कुदरत की है। लेकिन पैसों की समस्या निजी जीवन से जुडी है और फिर चुनाव भी नजदीक है। क्या पता टिकिट मिले भी या नहीं। ऐसे में निगम के हालात लगातार बिगड रहे है। फिलहाल पानी और पैसों की समस्या से जूझ रहे निगम के अफसर कर्मचारियों के वेतन को लेकर ज्यादा परेशान है। समस्या कैसे निपटेगी आने वाले समय में ही साफ होगा।

नेताजी है कि मानते नहीं

बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले नेताजी ने अपने प्लॉट पर मकान बनाना शुरु किया। बाद में वो जगह अवैध कॉलोनी में नजर आने लगी, आनन फानन में निगम के नेताजी ने अपने ही एक अधिकारी से सैटिंग की और अवैध कॉलोनी के दस्तावेजों को ठंडे बस्ते में डलवा दिया। मामला परेशानी का कारण न बन जाए इसको लेकर उन्होने राजस्व के कर्मचारियों की मदद ली। सूत्रों का कहना है कि बाद में इस रकबे को अलग कर दिया गया। अब जब जांच हुई तो इसका खुलासा हुआ कि अवैध कॉलोनी जिस रकबे में दिखाई जा रही थी उसमें नेताजी का मकान नहीं है। उसे पहले ही अलग कर लिया गया है। इसको लेकर जांच की बात कही जा रही है। यदि जांच हुई तो रकबा कब अलग हुआ और इसमें कौन कौन शामिल था सामने आ जाएगा। हालांकि अभी सब कुछ हिडन यानी छिपा हुआ है।

पानी की समस्या निपटाने गए नेताजी फाइलों पर अटके

सूत्रों ने बताया कि निगम में कुछ नेता तो अधिकारियों के पास पानी की समस्या निपटाने के लिए पहुंच रहे है लेकिन वे चलते चलते अपनी समस्या भी बता देते है। खबर है कि ये नेताजी धीरे से अपनी फाइलों को निपटाने की बात कह देते है। ऐसे में निगम के अफसर ये समझ नहीं पा रहे है कि किस समस्या को पहले निपटाया जाए। हालांकि फंड का आभाव अफसरों की बडी समस्या बनी हुई है। बहरहाल निगम में जो चल रहा है वह तमाम जनप्रतिनिधियों की जानकारी में है।