छिंदवाडा: भैया यदि महापौर के लिए आरक्षण में ओबीसी सीट हुई तो मैं चुनाव लडूंगा, यदि महिला हुई तो मैं, कांग्रेस के इन हालातों ने पूर्व सीएम कमलनाथ और पूर्व सांसद नकुलनाथ की चिंता बढाने का काम किया है। दरअसल दावेदार अपने उपर पूरा फोकस कर रहे है, उन्हें पार्टी से कोई लेना देना नहीं है। सबसे बडी प्राथमिकता टिकिट लाना है, यही वजह है कि अपने नेता के आते ही ये पदाधिकारी ऐसे सक्रिय होते है मानों इनके जैसा कोई है ही नहीं। कुछ समय से ये सिलसिला कांग्रेस में जोर पकड रहा है। हैरानी की बात ये है कि कांग्रेस का संगठन इस मामले में गंभीरता नहीं बरत रहा, यही बडी वजह है कि मैदान में कांग्रेस की भूमिका पर सवाल खडे होने लगे है। बूथों से संगठन गायब है। हालांकि पूर्व सांसद नकुलनाथ खुद इस मामले में नजर बनाए हुए है। उन्हाेने साफ कर दिया है कि यदि हालात न सुधरे तो ऐसे पदाधिकारियों को हटाया जाएगा जो अपनी महत्वकांक्षा के चलते पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे है। कुछ पदाधिकारियों को चिन्हित भी किया गया है। हो सकता है कि आने वाले समय में परिवर्तन देखने को भी मिल जाए। सूत्रों का कहना है कि ओबीसी से लेकर महिला तक ऐसे नेता महापौर का चुनाव लडना चाहते है जिनका जमीनी आधार है ही नहीं।
प्रत्याशी न बनाया तो विद्रोह की आशंका
सूत्रों का कहना है कि महत्वपूर्ण पदों पर बैठे ऐसे लोग प्रत्याशी न बनाए जाने पर विद्रोह भी कर सकते है। इसको लेकर वे अभी से टिप्पणी भी करने लगे है। ये वे लोग है जो महत्वपूर्ण पदों पर है। यदि इस ओर अभी से कांग्रेस ने सतर्कता न बरती तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि ये नेता पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते है। बताया ये भी जा रहा है कि कांग्रेस संगठन इस दिशा में गंभीर नहीं है। इनमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल है। सूत्रों का कहना है कि इन नेताओं का एक समूह भी बन गया है, जो एक साथ समय समय पर चर्चा कर विचार विमर्श कर रहा है। बहरहाल कांग्रेस नेताओं ने इस दिशा में अभी से ध्यान न दिया तो एक बार फिर पार्टी को ये नेता चुनौती पेश कर सकते है।
संगठन के बुरे हालातों पर ध्यान नहीं
हैरानी की बात ये है कि जहां एक ओर भाजपा अपने अनुसांगिक संगठनों को मजबूत करने में लगी है वहीं कांग्रेस में अनुसांगिक संगठनों के बुरे हालात है। इस ओर किसी भी वरिष्ठ नेता का ध्यान नहीं है। महिला संगठन से लेकर युवा संगठनों की स्थिति की चर्चा चारों ओर है, इनकी स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। बताया जा रहा है कि इन संगठनों के महत्वपूर्ण नेता खुद को पूर्व सांसद नकुलनाथ के नजदीकी होने की बात कहकर वरिष्ठ नेताओं की बातों को भी नजरअंदाज करने से नहीं चूकते। हालांकि पूर्व सीएम कमलनाथ और पूर्व सांसद नकुलनाथ ने संदेश दे दिया है कि आने वाले दो माह में इन संगठनों में बडा बदलाव किया जा सकता है। बहरहाल इन संगठनों में बदलाव न हुआ तो इस बात से इंकार नही किया जा सकता कि कांग्रेस मैदानी स्तर पर भाजपा के मुकाबले काफी पीछे हो जाएगी।










