छिंदवाडा: जिले की बैठक हो या फिर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के जिला कांग्रेस को दिए गए निर्देश, तमाम आयोजनों का मामला हो या फिर नाथ की बैठकों के आदेश, इन सभी की सूचना देने के लिए जिला कांग्रेस के पास कोई पदाधिकारी नहीं है। हालात ये है कि नगर कांग्रेस के भरोसे काम चल रहा है। बताया जा रहा है कि जिला कांग्रेस की सभी सूचनाएं नगर कांग्रेस के भरोसे आती है। ऐसे में ये कयास लगाए जा रहे है कि कहीं जिला कांग्रेस का रिमाट नगर कांग्रेस के हाथ में तो नहीं। एक जानकारी के अनुसार नगर कांग्रेस अपने दायित्वों को छोड जिला कांग्रेस की बैठकों और कार्यक्रमों में लग जाती है, ऐसे में शहर की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। आने वाले समय में सामने खडी चुनौती के बावजूद कांग्रेस की ये कार्यशैली नेताओं की समझ से परे है। बताया जा रहा है कि कुछ नेताओं ने इसको लेकर पूर्व में आपत्ति भी दर्ज भी करवाई थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। खबरों के अनुसार नगर कांग्रेस कार्यालय और कार्यक्रमों तक सिमटकर रह गई है।
वजनदारी पर उठने लगे सवाल
इस मामले में राजनीति के जानकार बताते है कि जिला कांग्रेस से सीधे निर्देश जारी न होने की वजह से बैठकों और आयोजनो की वजनदारी पर सवाल खडे होने लगे है। हालात ये है कि कई प्रतिनिधि न तो बैठकों में पहुंचना उचित समझते है और न नही आयोजनों मेँ। सूत्रों का कहना है कि नेता दबी जुबान से कहते नजर आते है कि नगर कांग्रेस के निर्देशों और सूचनाओं को वे उतनी गंभीरता से नहीं लेते क्येांकि वे जिला स्तर के नेता है। गौतरलब है कि जिला कांग्रेस की इस कार्यशैली को लेकर कांग्रेस के ही नेता दबी जुबान से चर्चा करते रहते है। बहरहाल जिला कांग्रेस ने अपनी कार्यशैली न बदली तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि आने वाले समय में जिला संगठन का अस्तित्व संकट में आ जाएगा।










