कौन है 27 फाइल ले जाने वाला पार्षद, क्यों भडक गए अधिकारी बॉथम, निगम में अचानक क्यों तेज हुआ फाइलों का खेल, जानकार बोले, पर्दे में रहने दो, पर्दा न उठाओ,,,,

छिंदवाडा: नगर निगम में हाल ही में हुई परिषद की बैठक के दौरान कई तरह के संकेत निकलकर सामने आए। भाजपा के पार्षदों के साथ साथ कुछ कांग्रेस पार्षदों की जुगलबंदी ने साफ कर दिया कि कुछ मुद्दों पर दोनों एक साथ कह रहे है कि हम साथ साथ है। उधर निगम के अफसर बॉथम का गुस्सा बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना रहा। गुस्सा भी ऐसा कि कह दिया कि गलत काम करुंगा नहीं यदि नहीं जमता तो ट्रांसफर करवा दो। उनके इस गुस्से साफ हो गया कि निगम में काफी कुछ गडबड है। बातों ही बातों में ये भी सामने आया कि मामला 27 फाइलों का है। सूत्रों का कहना है कि एक पार्षद की सत्ताईस फाइलें अधिकारी बॉथम के पास आगे बढाने के लिए पहुंचाई गई थी लेकिन उन्होने इससे अचानक इंकार कर दिया। उनका कहना था कि मामला नियमों के अनुसार हो तो सब चलेगा, लेकिन इस तरह से एक वार्ड की सत्ताईस फाइल करना उनके लिए अभ संभव नहीं है। अब ये बात चर्चा का विषय है कि आखिर वो कौन सा पार्षद है जिसकी सत्ताईस फाईलें अधिकारियों तक पहुंची थी। इसको लेकर पार्षद भी अपने अपने तरीके से अनुमान लगा रहे है। कहा जा रहा है कि दूसरे पार्षद इस बात को लेकर गुस्सा भी हुए कि आखिर एक ही वार्ड में इतने काम कैसे। सूत्रों का ये भी कहना है कि इन फाइलों की जांच हो जाए तो काफी कुछ सामने आ सकता है। ऐसे में कुछ पार्षद दबी जुबान से ये कहते नजर आ रहे है कि पर्दे में रहने दो पर्दा न उठाओ, पर्दा जो उठ गया तो,,,,,,

फाइलों का खेल क्यों हुआ तेज

निगम में कुछ दिनों से फाइलों का खेल तेज हो गया है। ऐसा क्यों हुआ इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे है। पार्षद अपने तरीके से वार्ड की फाइलों को बनाकर ले जा रहे है, अधिकारी पूरी सावधानी और सतर्कता के साथ इन फाइलों काे भुगतान के लिए आगे बढा रहे है। पार्षदों की शिकायत ये है कि इसमें हस्ताक्षर करने में देरी हो रही है। यही वजह है कि उनकी दूसरी फाइलों को बढाने और भुगतान करवाने में समय लग रहा है। उधर अधिकारियों की दो टूक से पार्षद भी सकते में है। सूत्रों का कहना है कि निगम के चुनाव के लिए कम समय बचा हुआ है और कुछ पार्षदों का मानना है कि आने वाले समय में चुनाव के दौरान उन्हें खर्च लगेगा। हो सकता है कि इसी क्रम में फाइलों का खेल तेज हुआ है। हालांकि पार्षद इस मामले में बेहद खामोश है। उन्होने कुछ भी कहने से इंकार किया है लेकिन अचानक निगम में आई फाइलों की बाढ ने काफी कुछ स्पष्ट करने का काम किया है।

भोपाल से अधिकारी को क्लीन चिट

सूत्रों का कहना है कि इस घटना की जानकारी भोपाल में दे दी गई है। वहां से अधिकारियों को ये कह दिया गया है कि नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई फाइलों को न किया जाए। इसके लिए यदि संभव हो तो भौतिक सत्यापन किया जाए। इन आदेशों के बाद अधिकारी भी निश्चिंत है। बताया जा रहा है कि स्थानीय बडे अधिकारियों ने भी इस मामले में अधिकारियों से जानकारी ली है और कहा है कि यदि कोई दिक्कत होगी तो वे इसका समाधान निकाल लेंगे। नियमों के विरुद्ध काम करने की जरुरत नहीं है।