पर्दे में रहने दो पर्दा न उठाओ की तर्ज पर परतला प्रोजेक्ट की कहानी, 55 लाख रुपए की जुबानी,, किसी को ज्यादा तो किसी को मिला कम,,इसी से हुआ विवाद का जन्म,, देने वाला निशाने पर,, भोपाल तक पहुंची आंच,,,

छिंदवाडा: नगर निगम में इन दिनों परतला प्रोजेक्ट सबसे ज्यादा चर्चाओं में है। होना भी चाहिए, बडा प्रोजेक्ट था, निगम को उबार सकता था, लेकिन इस प्रोजेक्ट ने शुरु में उन लोगों को उबारना शुरु कर दिया था जो निगम में खासा दखल रखते है। बाद में काम शुरु हुआ, सब कुछ सामान्य चल रहा था लेकिन बाद में निगम के पास इसे पूरा करने के लिए पैसे ही नहीं बचे। कोशिश हुई लेकिन खराब आर्थिक स्थिति की वजह से अब इसे निरस्त करने की नौबत आ गई। ये पूरा प्रोजेक्ट अपने पीछे एक ऐसी कहानी लिए बैठा है जिसे जानकर आप हैरान रह जाऐंगे। इसकी परते हम लगातार खोलेंगे। फिलहाल हमारे सूत्रों ने जो बताया वो किसी अजूबे से कम नहीं है।इस पूरी कहानी को पढकर आप भी समझ जाऐंगे कि आखिर हल्ला क्यों मचा है। सूत्रों का कहना है कि पूरा मामला 55 लाख की भारी भरकम रकम से जुडा हुआ है। ये वो राशि है जो शुरु में बांट ली गई। इसे किसने दी होगी आपके लिए इशारा काफी है। जैसे ही रकम मिली तो लेने वालों के चेहरे खिल उठे थे। जिनका इससे उद्धार हो रहा था, उन्हें नहीं मालूम था कि एक न एक दिन ये कहानी खुल जाएगी और वे बेनकाब हो जाऐंगे। इसमें उनका बिंदास होना इसलिए भी सही माना जा सकता है क्योंकि निगम में अक्सर इस तरह के लेनदेन का पता आसानी से नहीं चलता। खैर,, अब प्रोजेक्ट को निरस्त हो ही गया तो, इससे लाभ कमाने की मंशा रखने वाले को बडा झटका लगा, वह तिलमिला उठा और उसने वो तमाम जानकारियां साझा कर डाली जो नहीं करनी थी। सूत्रों का कहना है कि कुछ जनप्रतिनिधियों ने तो इसका रोना भी अपने खास लोगों के सामने रो दिया है। रोना भी ऐसा कि जितने मिलने चाहिए थे वो नहीं मिले, इसमें कम थे, जिसे मिले वो लेकर चला गया, अब हम क्या करें। यहां सबसे बडी बात ये है कि जल्दी ही इस लेन देन के प्रमाण सामने आने की संभावना बन रही है। यदि ऐसा हुआ तो फिर वो कटघरे में खडे होंगे जो खुद को कभी पाक साफ बताया करते घूम रहे है। हम आपको एक और पहलू से अवगत कराते है, वो ये है कि इस प्रोजेक्ट के मामले में कुछ माननीयों ने अपने स्तर पर ये तक प्रयास कर डाले कि उनके हक की राशि उन्हें दिलवाई जाए, दरअसल माननीयों का कहना है कि ये राशि किसी और ने ले ली है और उन्हें कम बताकर उसे वापस करने तैयार नहीं है।

एक बार लेन देन पूरा हो जाए फिर सब ठीक

सूत्रों का कहना है कि कुछ ने तो यहां तक कह दिया कि जो हमारे हिस्से की रकम थी वो हमें मिल जाए फिर सब ठीक, यदि ऐसा नहीं हुआ तो जिसने दिया है उसपर कार्रवाई करवाऐंगे। अब देने वाले की जमकर फजीहत हो रही है। सूत्र खबर दे रहे है कि जिसने ले लिया वह गायब, और जिसको बांटा गया वह यहीं है। यानी उसने अपने हिसाब से सबको मैनेज कर लिया। ऐसे हालात में सोने के अंडे देने वाले प्रोजेक्ट में पहले ही अंडे खत्म हो गए। यही वजह है की हंगामा बरप रहा है। किसको कितने मिले कोई कुछ कहने को तैयार नहीं है। इतना जरुर है कि माननीय इस बात से खुलकर इंकार कर रहे है। कुछ माननीयों ने उल्टे ये कह दिया कि किसे दिया यदि पता चल जाए तो उनका भी उद्धार हो जाएगा। बहरहाल कहानी में कितनी हकीकत और कितना फसाना है, आने वाले समय में खुलासा होने की संभावनाएं जोर पकड रही है। ऐसा होगा या नहीं ये अभी कहना मुश्किल है।