क्या है गिफ्ट का चक्कर,,दिल्ली से भी मिला तोहफा,,किस्मत नहीं दे रही साथ तो अपनाया ये तरीका,,नेताजी को उम्मीद खुल सकता है तकदीर का बंद ताला,,

छिंदवाडा: इन दिनों एक नेताजी गिफ्ट को लेकर सुर्खियां बटोर रहे है। राजनीतिक दल के एक नेताजी लगातार इस बात के प्रयास कर रहे है कि दिल्ली में वे अपना प्रभाव बना सके, लेकिन नाकाम होने के बाद उन्होने गिफ्ट का तरीका अपनाया। नेताजी के करीबी सूत्रों का कहना है कि दिल्ली के ही एक बडे नेता के करीबी को उन्होने शानदार तोहफा दिया और अपना काम बनाने का निवेदन किया, उन्हें इसका प्रतिसाद भी मिल गया। अब नेताजी इस तैयारी में है कि उनकी धाक बनेगी और वे जिले में अपना सिक्का स्थापित कर सकेंगे। नेताजी की उम्मीद को पर लगेंगे या फिर मामला गिफ्ट के बाद ऐसे ही थम जाएगा अभी कहना मुश्किल है लेकिन जो भी हो गिफ्ट ने जरुर अपना रंग दिखाना शुरु कर दिया है। खबर तो यहां तक है कि नेताजी को विरोधियों का साथ भी मिल रहा है। राजनीति में ऐसा पहली बार नजर आया है कि किसी तरह के प्रभाव को स्थापित करने के लिए महंगे गिफ्ट का उपयोग करना पड रहा है। फिलहाल गिफ्ट वाली राजनीति की चर्चा पूरे जिले में सुर्खियों में है। अब ये अलग बात है कि आने वाले समय में नेताजी का कद बढेगा या घटेगा स्पष्ट नहीं है।

हलचल हुई तेज

उधर कांग्रेस और भाजपा दोनो ही दलों की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। दोनों दलों में जिस तरह के हालात है उसको लेकर खूब चर्चाएं हो रही है। जहां भाजपा में दो गुटों के नेता अपने अपने तरीके से सक्रिय दिखाई दे रहे है तो कांग्रेस में भी एक दूसरे को निपटाने की राजनीति हावी दिखाई दे रही है। दोनों ही दलों के संगठन प्रमुख नेताओं की नजरें गुटबाज और गडबडी करने वालों पर लगी हुई है।