छिंदवाडा: विधानसभा चुनाव नजदीक है। कांग्रेस निगम और निकाय चुनाव में बेहतर कर पाई है, हालांकि दूसरे चरण में उसके साथ जो कुछ हुआ सबके सामने है। नेताओं के बीच चिंतन का दौर चल रहा है। बदलाव की बात सामने आ रही है, लेकिन महज बदलाव सब कुछ बदल देगा ऐसा सोचना भी कांग्रेस के लिए किसी बडे खतरे को आमंत्रित करने से कम नहीं होगा। भाजपा घात लगाए बैठी है, कांग्रेस में जरा भी नाराजी दिखी तो तत्काल उसे भुना लेगी। उधर कांग्रेस के लिए सबसे बडी मुश्किल ये है कि उसके कई नेता भीतर ही भीतर नाराज है और बाहरी तौर पर सब कुछ ठीक बता रहे है। ऐसे हालातों में आने वाला समय कैसा होगा इसका अनुमान लगाना ज्यादा कठिन नहीं होगा। सूत्रों की मानें तो जिले में ऐसे नेताओं की संख्या ज्यादा है। खबर ये भी है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और सांसद नकुलनाथ लगातार इस बात के प्रयास कर रहे है कि नए युवाओं को आगे आने का मौका दिया जाए और वरिष्ठ मार्गदर्शन करें, लेकिन ये बात कई वरिष्ठों को नागवार गुजर रही है और वे भीतर ही भीतर विरोधी पार्टी के शुभचिंतक बन बैठे है। कहा जा रहा है कि आने वाले समय में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और सांसद नकुलनाथ के होने वाले दौरे में इसी बात पर चिंतन भी किया जा सकता है।
- निगम में आक्रामकता से हो सकता है नुकसान
नगर निगम में कांग्रेस सरकार आने से उम्मीद जताई जा रही थी कि कांग्रेस को जमकर फायदा मिलेगा लेकिन जाे कुछ सामने आ रहा है उससे साफ होता जा रहा है कि आने वाले समय में यहां भी कांग्रेस संघर्ष की मुद्रा में होगी। जिस तरह से कांग्रेस के पार्षदों ने अफसरों पर रौबदारी की उससे अफसर सहम गए है, इसके अलावा नए अधिकारी के आने से स्थिति और भी संशय की हो गई है। वे जब तक समझेंगे काफी देर हो चुकी होगी और ऐसे में कांग्रेस के लिए काम करना आसान हो यह समझ नहीं आता। कहा तो ये भी जा रहा है कि नए अफसर बेहद तल्ख और सख्त स्वभाव के है जिसके कारण पार्षद परेशान नजर आ रहे है। उधर भाजपा में नेता प्रतिपक्ष और अन्य पार्षदों के बीच चल रही खीचतान ने कांग्रेस को बल देने का काम जरूर किया है लेकिन इन सबके बीच कांग्रेस के पार्षदा सभापति और महापौर काम को कैसे अंजाम दे पाऐंगे, यह आने वाले समय में तय होगा। फिलहाल निगम पर सांसद नकुलनाथ लगातार नजरें जमाए बैठे है।










