छिंदवाडा: इन दिनो कांग्रेस में नगर निगम को लेकर चर्चाएं गर्म है। हर कोई नगर निगम को लेकर तरह तरह के कयास लगा रहा है। कोई कह रहा है कि इस बार काग्रेस के लिए नगर निगम भारी पडेंगी तो कोई इससे अच्छा खासा फायदा कांग्रेस को होने का अनुमान लगा रहा है। कुल मिलाकर नगर निगम पर कांग्रेस और भाजपा के वरिष्ठ नेताओ की नजरें लगी हुई है। ऐसे में निगम के प्रतिनिधि की कार्यशैली को लेकर आंकलन किया जाने लगा है। जानकारो का मानना है कि निगम में कांग्रेस के पार्षदों के बीच समन्वय नहीं बन पा रहा है, हालात ये है कि कांग्रेस में अलग अलग मुद्दों पर पार्षदों की अलग अलग राय होने लगी है। जबकि सांसद नकुलनाथ लगातार पार्षदों और प्रतिनिधियों के बीच समन्वय स्थापित करने पर जोर देते रहे है बावजूद इसके कोई खास परिवर्तन नजर नहीं आ रहा है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस बात से खासे परेशान है कि कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में शहर से कितना फायदा होगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि फिलहाल हालात बहुत बेहतर हो ऐसा कहना बेमानी होगी। अभी और काम करने की आवश्यकता है। निगम के प्रतिनिधियों को समझना होगा। विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए काम न किया गया तो इसका नुकसान भी हो सकता है। उधर भाजपा की नजरें पूरी तरह से निगम पर टिकी हुई है।
- खत्म नहीं हो रहा शिकायतों का दौर
कांग्रेस में हालात ये है कि काफी समय बीत गया अभी तक यहां के प्रतिनिधि सांसद नकुलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास केवल शिकायतें लेकर पहुंच रहे है। इससे स्पष्ट है कि यहां सामंजस्य स्थापित नहीं हो पा रहा है। सूत्रों के अनुसार हर दूसरे दिन अफसरों से प्रतिनिधि दो चार हो रहे है। ऐसे में शहर के विकास के काम बुरी तरह प्रभावित हो रहे है, कांग्रेस के प्रतिनिधियों की शिकायत है कि अफसर नहीं सुनते और अफसरों की मानें तो हालात ऐसे है कि काम करना मुश्किल हो रहा है। दोनों ही स्थितियां कांग्रेस के लिए परेशानी खडी कर सकती है।
- अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग
कांग्रेस के पार्षदों और प्रतिनिधियों में समन्वय कितना बेहतर है इसका एक ताजा उदाहरण सामने आया था। अफसरों की कार्यशैली को लेकर एक सभापति ने अफसरों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की बात रख डाली, सभी को फोन भी किए गए लेकिन केवल तीन सभापतियों ने ही इसमें हामी भरी, और बाद में इस प्रस्ताव को न लाने का फैसला लिया गया। हैरानी वाली बात ये है कि इसकी जानकारी न तो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को है और न ही सांसद नकुलनाथ को। इन हालातों को लेकर कांग्रेस के कुछ नेताओं ने चिंता भी जाहिर की है।










