भोपाल: पूर्व सीएम कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच विवाद के कारण प्रदेश की सरकार गिरी, ये बात भले ही नई न हो लेकिन दिग्विजय सिंह ने एक इंटरव्यू में अभी इस बात को कहकर नया विवाद छेड दिया है। कहा जा रहा है कि श्री सिंह ने पूर्व सीएम और सिंधिया को सरकार गिरने का दोषी करार देते हुए खुद को इस विवाद से अलग कर लिया। इंटरव्यू में जिस तरह की बातों को दिग्विजय सिंह ने बताया है वह चौकाने वाली है। ऐसा इसलिए भी कहना लाजमी है क्योंकि सरकार के चलते श्री सिंह का क्या कद था किसी से छिपा नहीं था। ऐसे में उनका इस विवाद से कोई लेना देना न मानना किसी के गले नहीं उतर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकार के दौरान अधिकांश फैसलों में दिग्विजय सिंह की भूमिका नजर आती थी, वे नाथ के भाई के तौर पर काम कर रहे थे, सरकार के दौरान उनके बयानों में इस तरह की बातें सामने भी आती रही है। फिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि सरकार गिरने के लिए नाथ और सिंधिया को वे दोषी क्यों ठहरा रहे है। इस बात के कई मायने निकाले जा रहे है। अचानक सामने आए उनके इन बयानों को सिंधिया के साथ नजदीकी से जोडकर भी देखा जा रहा है। हालांकि श्री सिंधिया ने साफ कर दिया कि वे पुरानी बातों को दोहराना नहीं चाहते। उधर पूर्व सीएम कमलनाथ ने भी कह दिया है कि सरकार गिरने की वजह केवल सिंधिया की महत्वकांक्षा नहीं बल्कि दिग्विजय सिंह की सरकार में दखलअंदाजी का अनुमान भी रहा है। नाथ ने इस आशय का एक ट्वीट भी किया है। उनके ट्वीट के बाद कांग्रेस की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा है कि पुरानी बातों का जिक्र करने से कोई फायदा नहीं है। बहरहाल दिग्विजय सिंह के इस इंटरव्यू के कई मायने निकाले जा रहे है।
सिंधिया से हटकर नाथ से बैठक करते थे दिग्विजय सिंह
इस बात का जिक्र अक्सर होता रहता था कि सरकार के दौरान पूर्व सीएम कमलनाथ के फैसलों में अक्सर दिग्विजय सिंह शामिल रहते है। कुछ मंत्रियों और विधायकों ने अप्रत्यक्ष तौर पर इसे स्वीकार भी किया था। नाथ को इस बात से इन प्रतिनिधियों ने अवगत भी कराया था, लेकिन उन्होने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। बताया तो ये भी जा रहा है कि सिंधिया समर्थक कुछ मंत्री भी इस बात से खफा थे, हालांकि आज के समय में भले ही वे कुछ न कहे लेकिन अधिकांश पुराने विधायक इसे स्वीकार करने से नही चूकते। इन सबके बावजूद श्री सिंह का विवाद से खुद को अलग मानना, नेताओं के गले नहीं उतर रहा है।
कहीं हाथ पकडकर मंच पर लाने से तो नहीं बदले तेवर
एक अनुमान तो ये भी लगाया जा रहा है कि पिछले दिनों ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जिस तरह से दिग्विजय सिंह के प्रति साफ्ट कार्नर दिखाया था, कहीं ये उसका तो असर नहीं। दरअसल एक समारोह में सिंधिया ने दिग्विजय सिंह का हाथ पकडकर मंच तक लाने की कोशिश की थी। इसके बाद दोनों के संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थी। फिलहाल दिग्वियज सिंह का ये बयान एकाएक सामने क्यों आया, इसपर कांग्रेस के नेता चिंतन कर रहे है।










