छिंदवाडा: इन दिनों कांग्रेस में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पिछले दिनों हुए आयोजन को लेकर चिंतन चल रहा है। दरअसल विश्व आदिवासी दिवस पर दशहरा मैदान में हुए भव्य आयोजन के बाद सडकों पर दिखे आदिवासी समुदाय के लोगों ने कांग्रेस की चिंता बढा दी है। बताया जा रहा है कि पहली बार इतनी बडी संख्या में मुख्यालय में आदिवासी समुदाय के लोगों ने बडा आयोजन किया है। गोंडवाना पार्टी के नेताओं ने इस आंदोलन में महती भूमिका निभाते हुए आदिवासियों का नेत्रत्व भी किया। कहा जा रहा है कि इस बडे आयोजन के पीछे शहर के दो बडे फाईनेंसरों ने मदद की है। हालांकि बात अपुष्ट है लेकिन चर्चाओं में इन फाइनेंसरों के नाम भी तैर रहे है। सूत्रों की माने तो दोनों ही बडे कॉलोनाइजर बताए जा रहे है। खबर है कि किसी बडे नेता के इशारों पर ये काम किया गया है। यदि ऐसा है तो कांग्रेस को कमजोर करने की बडी रणनीति के तहत ये काम किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो हर्रई और अमरवाडा के अलावा तामिया और जुन्नारदेव में आदिवासियों की बडी संख्या है और इन्हें एकजुट करने के लिए गोंडवाना पूरे प्रयास कर रही है। कांग्रेस के नेता इस बात से भी परेशान है। यदि ऐसा हो गया तो आने वाले चुनाव में ये क्षेत्र कांग्रेस के लिए बडी चुनौती बन जाऐंगे। माना जा रहा है कि कांग्रेस के विरोधी इसी रणनीति पर काम भी कर रहे है।
पहले भी गोंडवाना बन चुकी सिरदर्द
पहले भी कांग्रेस के लिए गोंडवाना बडा सिरदर्द बन चुकी है। मनमोहन शाह बट्टी के समय कांग्रेस ने गोंडवाना के कई नेताओं को तोडा था। इस रणनीति के चलते कांग्रेस को बडी कामयाबी भी मिली थी। पूर्व सीएम कमलनाथ ने जिस तरह से इस मामले में नेताओं को सक्रिय किया था, उससे कांग्रेस को फायदा मिला था, लेकिन इस बार ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा। राजनीति विश्लेषक मानते है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में गोंडवाना लगातार मजबूती की राह पर निकल पडेगी और उसे तोडना आसान नहीं होगा। कांग्रेस विरोध दल भी इस मामले में सक्रिय हो गए है। बहरहाल गोंडवाना को पर्दे के पीछे से मिल रही मदद ने कांग्रेस नेताओं के सामने कई सवाल खडे करने का काम किया है।










